जोधपुर की सड़कों पर जाडू लगाने वाली कैसे बनी RAS

ये कहानी है आशा कंडला की जो जोधपुर की सड़कों पर जाडु लगाया करती थी और आज गर्व से अपने आपको एस.डी.एम कहती है। राजस्थान आर. ए. एस.(RAS) का रिजल्ट आने के बाद उनकी जिंदगी ही बदल गई। 

आशा कंडला इंटरव्यू में बताती है कि पारिवारिक कलह के चलते उनके पति ने उनको दस साल पहले छोड़ दिया था। उनके दो बच्चे है जिनकी जिम्मेदारी पति के अलग होने के बाद उन पर आ गई। खर्चा चलाने के लिए उन्होंने सफाईकर्मी की नौकरी ज्वाइन कर ली। 

वे रोज सुबह अपने बच्चो को स्कुल भेजने के बाद जोधपुर शहर की सड़के साफ किया करती थी। इसके लिए कई लोग उन्हें ताना भी मारते थे क्योंकि वो एक ऐसे घर से थी जहाँ किसी ने कभी इस तरह का काम नहीं किया जो छोटी जाति का काम माना जाता है। इस कारण वो जान पहचान वालो की नजरों से बचने के लिए मुँह पर कपड़ा बांधकर जाडु लगाती थी। 

थककर अगर वो आराम करने बैठ जाती तो उन्हें कई बार ये ताना मारा जाता की अफसर हो! या तुम्हारे घर में कोई अफसर है! जो ऊपर बैठी हो तुम्हारी जगह नीचे है वही अच्छा लगता है। तब आशा कंडला ने ठान लिया की अब तो अफसर बनकर दिखाऊंगी। उन्होंने पहले राजस्थान एडमिनिस्ट्रेशन सर्विस (RAS) की पड़ताल की और परीक्षा के बारे में जाना।

 पुरे दिन सफाई का काम करके वे घर पर आकर घर का सारा काम निपटाती थी और बच्चो के सो साने के बाद रात में आर.ए.एस. की परीक्षा की तैयारी करती थी। इस बीच उन्हें सोने का बहुत कम समय मिलता था। कई बार काम पर देर से पहुँचने पर उन्हें फटकार भी लगाई जाती थी।

 दो साल तक ये सिलसिला यू ही चलता रहा और देखते ही देखते उन्होंने प्री और मेंस परीक्षा अच्छे नंबरो से पास कर ली। अब इंटरव्यू की बारी थी जिसके लिए वो सबसे ज्यादा नर्वस थी क्योंकि उन्होंने कभी बड़े लोगो का सामना नहीं किया था। हलाकि उनका इंटरव्यू इतना अच्छा नहीं गया और उन्होंने उम्मीद कर ली थी कि इस बार भी उनका चयन नहीं हो पाएगा। 

आर.ए.एस का रिजल्ट दो साल बाद आया तब तक वे सफाई के काम में ही लगी रही। फिर एक दिन अचानक उनके परिवार के किसी सदस्य ने उन्हें बताया कि उनका चयन आर.ए. एस. में हो गया है और वे एस.डी.एम (SDM) बन गयी है। ये सुनकर वे ख़ुशी से फुले नहीं समा पाई। जब ये बात उनके परिवार वालो और रिश्तेदारो को पता चली तो उनके घर लोगो का हुजूम उमड़ पड़ा। अखबारों ने भी उनकी खबर विस्तार से छापी।

जोधपुर की मेयर और कई अफसरों ने उनके घर आकर उन्हें बधाई दी। कई न्यूज़ चैनलों ने उनका इंटरव्यू किया और वे युवाओ के लिए रोल मॉडल बन गई। आशा कंडला ने बता दिया की जिद हो तो होसलो को बढ़ने और सपने साकार होने से कोई नहीं रोक सकता।

Written by : Ankit Gehlot

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