बच्चे हुए ऑनलाइन यौन शोषण के शिकार : फेसबुक-इंस्टा का कहना अपनी उम्र से बड़े दिखने लगे है बच्चे | Bachche Hue Online Yon Shoshan ke Shikaar

“वो उम्र नादान  थीं, यह  उम्र  हैरान  है ” किसी  शायर  की  यह  पंक्तियाँ  आज  के समय  में  सटीक  बैठती  है।

आजकल  का बच्चा  माँ  से ज्यादा  मोबाइल  के करीब है, कुछ  अभिभावक की दिनचर्या भी ऐसी  हो चुकी  है  कि  उनके  पास अपने बच्चे की गतिविधियो पर ध्यान  देने  का समय नहीं है। 

बच्चे हुए ऑनलाइन यौन शोषण के शिकार :  फेसबुक-इंस्टा का कहना अपनी उम्र  से बड़े  दिखने लगे है बच्चे | Bachche Hue Online Yon Shoshan ke Shikaar

बच्चे हुए ऑनलाइन यौन शोषण के शिकार : Bachche Hue Online Yon Shoshan ke Shikaar

उन्हें नहीं पता  कि उनका  बच्चा सोशल  नेटवर्किंग साइट्स  पर किस  हद तक एडिक्टेड हो चुका  है।

तभी Facebook (नया नाम मेटा) ने यह पहल  की है  कि वह बाल यौन शोषण के कंटेंट को छाँटकर पता लगाये कि  कितने बच्चे इसका शिकार  हो रहे हैं।

 बहुत से मनोविज्ञानिक स्टडीज  बता चुकी  हैं कि आजकल के बच्चे अपनी उम्र से बड़े दिखने लग जाते  हैं।

फेसबुक-इंस्टा का कहना अपनी उम्र से बड़े दिखने लगे है बच्चे

हर चीज़  को समय से  पहले जानना  ही  बच्चों के मानसिक विकास  को प्रभावित करता है, जिससे वे अपनी आयु  से  ज्यादा बढ़े लगने लग जाते हैं और एक दिन जल्दी  बूढ़े  भी हो जायेगे ।

इन्ही कारणों से  “एक्सचेंज”, जो फेसबुक से ऐसा कंटेंट छांटने और हटाने का काम कर रही है, वे  सभी डाटा  और  फोटो के बारे  में सही  रिपोर्ट  नहीं दे पाती। मेटा ने अपनी डॉटर कंपनियों फेसबुक, इंस्टाग्राम, मैसेंजर और वॉट्सऐप को यही निर्देश  देता  है कि  वह ऐसे  आपत्तिजनक  कंटेंट   के बारे  में  रिपोर्ट  करें ।

हालाँकि फेसबुक हर साल इम मामले से जुड़ी लाखों फोटो और वीडियो रिपोर्ट करने  का काम  कर रही  है। मगर जब किसी व्यक्ति की उम्र पता नहीं होती है  तो  फेसबुक उसे वयस्क मान लेना बेहतर  समझती  है।

यौन शोषण  कंटेंट  के बारे  में  रिपोर्ट  करती कई बड़ी कंपनियां

कॉर्पोरेट ट्रेनिंग के एक डॉक्यूमेंट और इंटरव्यू में हाल फ़िलहाल यह पता चला है कि फेसबुक उम्र पहचानने के लिए टेनर स्टेजेस का पालन कर रही है।

इन्हें ब्रिटिश पीडियाट्रिशियन डॉ. जेम्स एम. टेनर ने बनाया था। प्यूबर्टी के दौरान व्यक्ति में होने वाले बदलावों के आधार पर उन्होंने ये तय किया था कि  किस तरह टीनएजर्स में  हॉर्मोन का बदलाव  होता  है ।                                                        

मगर  विशेषज्ञ मानते हैं कि यौन शोषण को पहचानने में इन तथ्यों  का  प्रयोग  करना पूरी तरह गलत होता है।

जब  वो अपनीं उम्र से  बड़ा दिखने लगते है तो  बच्चों को वयस्क मान लिया जाता है, जिस कारण उनकी  यौन शोषण की रिपोर्ट नहीं हो पाती है।

अब तो एपल, स्नैपचैट और टिकटॉक जैसी कई बड़ी कंपनियां ऐसे सभी यौन शोषण के कंटेंट को रिपोर्ट करने  लगी है, जिनमें व्यक्ति की उम्र का पता नहीं चलता है ।

मगर गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और ट्विटर जैसी कंपनियों ने फिलहाल इस गंभीर मुद्दे को लेकर कोई कदम  नही उठाया  है।

भारत में  बड़ा  बाल यौन शोषण: 3 साल में 24 लाख मामले सामने आए

भारत  में बाल  शोषण के क्राइम में  वृद्धि हो रही है। भारत में 2017 से 2020 के बीच लगभग 24 लाख ऑनलाइन बाल यौन शोषण के मामले सामने आए हैं ।

जिसमे  से  80% लड़कियां 14 साल से कम उम्र की मिली  थीं । एक रिसर्च से यह भी सामने आ चुका  है कि हर दिन 1,16,000 बार चाइल्ड पोर्नोग्राफी का कंटेंट इंटरनेट पर खोजा जाता है।  हर साल एक नया आंकड़ा इस अपराध में जुड़ जाता है।

बच्चों का बचपन ज्यादा एडवांस होने की वजह से पोषित  से शोषित हो चुका है और यह बहुत चिंतनीय बात  है ।

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