Mars Perseverance Rover 2022 in Hindi, Information, Working, and Cost

Mars Perseverance Rover 2022

कहते हैं, आज से 3.5 बिलीयन साल पहले जब तक मंगल का एटमॉस्फेयर खत्म नहीं हो गया था मंगल काफी हद तक हमारी पृथ्वी के जैसा था। यानी कि पृथ्वी की तरह यहां भी लिक्विड वॉटर प्रचुर मात्रा में मौजूद था।

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Mars Perseverance Rover 2022 in Hindi
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वहां पानी के बड़े-बड़े झील भी थे और वह नदियां भी वह करती थी। पृथ्वी पर पानी जीवन का मूल स्त्रोत है। यह जीवन आज जिस भी रूप में मौजूद है उसकी उत्पत्ति का कारण पानी ही था।अब सवाल यह है कि, पानी ने जब पृथ्वी पर जीवन को संभव बनाया तो क्या यह संभव नहीं कि पानी की मौजूदगी के कारण उस समय मंगल ग्रह पर भी जीवन किसी न किसी रूप में पनपा हो। इसी महत्वपूर्ण सवाल का जवाब ढूंढने के लिए NASA ने Perseverance Rover को मंगल पर भेजा जो कि 18 फरवरी 2021 को मंगल ग्रह की सतह पर सफलतापूर्वक लैंड भी कर गया।

क्या मंगल पर भी कभी जीवन किसी रूप में मौजूद था? नासा सहित विश्व के अन्य स्पेस एजेंसी सालों से इस सवाल का जवाब ढूंढने की कोशिश में लगे हैं। नासा के स्पिरिट और अपॉर्चुनिटी रोवर के जरिए पहली बार हमें यह पता चला कि मंगल के सतह पर एक समय लिक्विड बॉर्डर मौजूद था।

इस खोज को आगे बढ़ाते हुए नासा के क्यूरियोसिटी रोवर ने मंगल पर आज से 4 बिलियन साल पहले मौजूद कंडीशन के बारे में पता लगाया जिससे इस संभावना को बल मिला कि मंगल पर शायद जीवन किसी न किसी रूप में कभी जरूर बनता होगा पर यह मात्र एक संभावना थी।

Mars Perseverance Rover 2022 in Hindi, Information

असल में ऐसा था या नहीं यह जानने के लिए हमें पुख्ता प्रमाण की जरूरत थी और उस समय मंगल पर मौजूद रोवर या तो इन एक्टिव हो गए थे या फिर वह इतने कैपेबल नहीं थे कि सदियों पहले मंगल पर मौजूद जीवन का प्रमाण ढूंढ सके।इसलिए हमें एक नए रोवर की जरूरत थी जो मंगल ग्रह पर जाकर वहां की मिट्टी और चट्टानों का निरीक्षण करें और वह खरगोश साल पहले मौजूद जीवन के सिग्नेचर का पता लगाएं इसलिए जन्म हुआ NASA के Perseverance मिशन का।

Perseverance मॉडर्न एडवांस इंस्ट्रूमेंट से लेस एक एडवांस रोवर है जिसे मंगल ग्रह को और बेहतर तरीके से एक्स्प्लोर करने के लिए भेजा गया है।इसका पहला मकसद यह पता लगाना है, कि क्या मंगल पर कभी जीवन किसी रूप में मौजूद था। इसके लिए मंगल ग्रह की सतह पर पास्ट मिक्रोबिअल लाइफ के बायोसिगनेचर का पता लगाएगा। दूसरा मिशन है की मंगल गृह के रॉक्स और मिट्टी के सैंपल को कलेक्ट कर के उन्हें एक तुबे में सुरक्षित कर मंगल ग्रह पर ही छोड़ देना ताकि भविष्य के मिशन द्वारा इन सैम्पल्स को पृत्वी पे लाकर उनके बारे में अच्छी तरीके से जाना जा सके।

इसके अलावा Perseverance मंगल ग्रह के जियोलॉजी को भी स्टडी करेगा। फ्यूचर में मानवों को मंगल पर भेजने की प्लानिंग भी चल रही है और मानवों के सर्वाइवल के लिए ऑक्सीजन बेहद जरूरी है।

हम जानते हैं कि मंगल के वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड काफी ज्यादा मात्रा में मौजूद है। तो, इस कार्बन डाइऑक्साइड से अगर हम ऑक्सीजन प्रोड्यूसर कर पाए तो मंगल पर भविष्य में मानव बस्तियां बसाने के लिए या फिर नॉर्मल मन मिशंस के लिए भी यह बेहद फायदेमंद साबित होगा।

What are 3 facts about Perseverance rover?

इसलिए Perseverance के साथ मौक्सी (MAUKSI) नाम का एक इंस्ट्रूमेंट भी टेस्टिंग के लिए भेजा गया है। यह इंस्ट्रूमेंट मंगल ग्रह के वातावरण में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड से ऑक्सीजन बनाएगा यह इंस्ट्रूमेंट अगर वह सही तरीके से काम कर जाता है तो फ्यूचर एक्सप्लोरर्स को इससे काफी ज्यादा फायदा होगा इसकी मदद से वह वहां प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन कर पाएंगे।इस ऑक्सीजन का इस्तेमाल वह साँस लेने के अलावा राकेट प्रोपेलेंट के रूप में भी किया जा सकेगा। मंगल पर पहली बार पावर फ्लाइट को टेस्ट करने के लिए Perseverance के साथ पहली बार ड्रोन जैसा हेलीकॉप्टर भी भेजा गया है। Perseverance मंगल पर पृथ्वी के 687 दिन रहकर जगीरो क्रेटर(JEZERO CRATER) को एक्सप्लोर करेगा।

पृथ्वी से Perseverance को अटलस 5 रॉकेट के जरिए 30 जुलाई 2020 को लांच किया गया था और 18 फरवरी 2021 को मंगल के इक्वेटर के नजदीक जगीरो क्रेटर के सत्ता पर सफलतापूर्वक लैंड कर गया। आइए जानते हैं कि की लैंडिंग कैसे हुई और इसे इस खास लोकेशन पर ही लैंड क्यों करवाया गया।

Rover जैसे किसी भी स्पेसक्राफ्ट को दूसरे ग्रह पर तीन स्टेटस में लैंड करवाया जाता है यह स्टेटस होते हैं एंट्री, डिसेंट और लैंडिंग। जहां तक मंगल की बात है इन तीनों स्टेटस को कंप्लीट होने में 7 मिनट लगते हैं।

इस दौरान स्पेसक्राफ्ट को यह तीनों स्टेप्स खुद ही पार करने होते हैं क्योंकि पृथ्वी से काफी दूर होने के कारण हमारा सिग्नल मंगल पर तुरंत नहीं पहुंचता जिसके कारण उस दौरान पृथ्वी से हम उसे मैनुअली कंट्रोल नहीं कर सकते।इसलिए इन 7 मिनट में कुछ भी हो सकता है। यही कारण है कि वैज्ञानिक इन 7 मिनट को 7:00 Minutes of Terror कहते हैं।

Is Perseverance rover still working?

मंगल के अत्मोस्फियर में एंटर करने से लगभग 10 मिनट पहले रोवर का वह स्पेसक्राफ्ट वाला पाठ अलग हो गया जो इसे पृथ्वी से मंगल तक ले गया था। इसके लगभग 10 मिनट बाद यह मंगल के वातावरण में इंटर कर गया जहां यह 12000 से 13000 मील प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रैवल करने लगा।

मंगल के वातावरण में मौजूद परीक्षण के कारण इसकी रफ्तार धीरे-धीरे धीमी होती गई पर इसी परीक्षण के कारण वह काफी हिट भी जनरेट होने लगी। इस हिट से रोवर को कोई नुकसान न हो यह सुनिश्चित करने के लिए इसमें हीट शील्ड भी लगाया गया था।

इसी हीट शील्ड ने Perseverance को इस हीट से बचाया। मंगल ग्रह के वातावरण में उड़ता हुआ लगातार नीचे जाता रहा।जब इसकी रफ़्तार काफी कम हो गई तो इसमें लगे पैराशूट को खोल दिया गया जिसने इसकी रफ्तार को और कम कर दिया।

Perseverance का एंट्री, डीसेंट और लैंडिंग काफी हद तक क्यूरियोसिटी से इंस्पायर्ड था। पर Perseverance उससे साइज में भी बड़ा था और इसमें उससे कहीं ज्यादा बेहतर इंस्ट्रूमेंट भी लगे हुए थे। इस कारण की मुश्किल लैंडिंग साइट पर भी आसानी से लैंड कर सकता था।

इसे जगीरो क्रेटर पर लैंड करना था, जो कि एक बेहद ही खतरनाक एरिया था क्योंकि Perseverance काफी नीचे आ चुका था अभी से अपने हिट सेट की जरूरत नहीं थी यह सुनिश्चित करने के लिए कि जहां यह लैंड करने वाला है वो एरिया सेफ है इसे अपने कैमरों का इस्तेमाल करने की जरूरत थी।

इसलिए इस समय हिट शील्ड को Perseverance खुद से अलग कर देता है। Perseverance ऐसा पहला मिशन था जिसमें टेर्रेन रिलेटेड नेविगेशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इसके कारण पैराशूट से नीचे उतरने के दौरान इसने जगीरो क्रेटर की लगातार तस्वीरें ली और इन तस्वीरों के आधार पर डिसाइड किया कि लैंड करने के लिए कौन सा एरिया सबसे सूटेबल है।

How long will Mars Perseverance rover last?

परसवेरान्स के यह डिसाइड करने के बाद कि उसे कहां लैंड करना है, उसका पैराशूट उससे अलग हो गया उसके बाद उसमें लगे हुए रॉकेट डिप्लोये आए हुए जिसने इसकी स्पीड को इतना कम कर दिया कि यह जमीन पर आराम से उतर सके।

रोवर जब मंगल के जमीन पर सफलतापूर्वक लैंड कर गया तो इसका डिसेंट तेज इससे अलग होकर उड़ता हुआ उससे दूर चला गया। मंगल को स्टडी करने के लिए मंगल पर केवल लैंड या रोवर को भेज देना ही काफी नहीं होता बल्कि हमें एक बेहतर लैंडिंग साइट का भी चुनाव करना जरूरी होता है।

इस बेहतर लैंडिंग साइट का चुनाव कुछ खास बातों का इस्तेमाल रखकर किया जाता है। जैसे हमारा लैंडिंग साइट किसी नीति जगह पर होना चाहिए ना की किसी बेहद ऊंची जगह पर ऐसा इसलिए क्योंकि जब हमारा स्पेसक्राफ्ट मंगल के वातावरण में इंटर करता है तो उसकी रफ्तार काफी ज्यादा होती है जिसे बाद में हम पैराशूट का इस्तेमाल करके करते हैं।

ऐसेमे अगर हमारा लैंडिंग साइड किसी ऊँची जगह पर हो तो हमारे स्पेसक्राफ्ट को अपनी रफ्तार कम करने का मौका ही नहीं मिलेगा जिसके कारण वह टकरा जायेगा।उसी तरह हम अपने स्पेसक्राफ्ट को किसी ऐसी जगह भी नहीं उतार सकते इतना धूल मौजूद की हमारा स्पेसक्राफ्ट उसी में कहीं गुम हो जाए।

जब भी हम अपने स्पेसक्राफ्ट को MARS पर भेजते हैं, हमारा मकसद होता है मंगल के बारे में और ज्यादा जानकारी जमा करना यह तभी मुमकिन है जब हमारा रोवर आसपास के इलाकों में घूमकर उन इलाको का मुआयना कर सके। इसलिए हमारा एंडिंग साइड ऐसी जगह भी नहीं होना चाहिए जहां हमारा रोवर आसपास घूम न सके।

रोवर में लगी बैटरी को चार्ज करने के लिए सोलर सेल्स का इस्तेमाल किया जाता है। और यह सोलर सेल्स तभी काम आएंगे जब हमारा लैंडिंग साइड ऐसा हो जहा सोलर लाइट की कोई कमी ना हो। और ऐसा इलाका ज्यादातर इक्वेटर के पास ही होता है इसलिए ज्यादातर लैंडिंग साइड इक्वेटर के पास ही हमें देखने को मिलते हैं।

अब तक आप जान चुके होंगे की Perseverance का मकसद मंगल पर मौजूद पास्ट लाइफ का पता लगाना है। और आप यह भी जानते हैं कि Perseverance का लैंडिंग साइड जगीरो क्रेटर था।

हम जानते हैं कि मंगल ग्रह पर कई सारे क्रेटर मौजूद है लेकिन इस खास साइड को ही क्यों चुना गया लैंडिग के लिए। आइए इसका कारन जानते है।

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Perseverance ने इस ब्लू सरकल वाले एरिया में लैंड किया मंगल का शतक काफी ज्यादा ठंडा और ड्राई है जो कि पृथ्वी पर मौजूद किसी भी तरह के जीवन की उत्पत्ति के लिए सूटेबल नहीं है।

पर जगीरो क्रेटर बिलियन सालों पहले बना था और एक ऐसा समय था जब यह पूरी तरह पानी से भरा हुआ था। यानी कि लेक तहो के साइज का एक पानी का लेख किसी जमाने में यहां मौजूद था। जैसे-जैसे मंगल का क्लाइमेट बदलता गया लेख जगीरो सूखता गया और धीरे-धीरे इसकी सतह से पानी एकदम गायब हो गया।

पास्ट लाइफ के सिग्नेचर का पता लगाने के लिए ऐसी जगह से अच्छी कोई जगह नहीं हो सकती जहां पहले कोई बड़ी झील मौजूद रही हो क्योंकि पृथ्वी पर पानी के इलाकों में हमें लिविंग क्रिएचर्स भरे पड़े मिलते हैं इन लिविंग क्रिएचर के एविडेन्स अक्सर इन लेक्स के बॉटम में मौजूद मड और सेंड में प्रिजर्व रह जाते हैं।

इसलिए Perseverance कुछ ऐसे इंस्ट्रूमेंट अपने साथ ले गया है जिनका इस्तेमाल करके यह जगीरो क्रेटर में मौजूद रॉक को एक्स्प्लोर कर पायेगा और उनमें लाइफ के सिग्नेचर को डिटेक्ट कर पाएगा।मंगल के जगीरो क्रेटर की अगर बात करें, तो यहां हमें अन्सिएंट लेक की मौजूदगी के प्रमाण साफ-साफ दिखाई देते हैं। क्रेटर रिम को काटने वाला ये कैनियन, यहां बहने वाली नदी के द्वारा बनाया गया होगा।

इस पानी के बहने की रफ्तार लेख में घुसने के बाद घट जाने के कारण इसके द्वारा अपने साथ लाया गया सैंड और मड, यही जमा होता गया होगा।

Perseverance रोवर इस वाइट लाइन को फॉलो करते हुए इस इलाके को एक्स्प्लोर करेगा इस दौरान रोवर में लगे इंस्ट्रूमेंट के जरिए किया जाएगा यहां मौजूद पुराने लेक के शोर लाइन को इन्वेस्टीगेट किया जाएगा।

अंत में रिम को एक्स्प्लोर किया जाएगा, जगीरो क्रेटर का निर्माण पॉसिबली मंगल से किसी विशाल ऑब्जेक्टिव कॉलेजन से हुआ होगा। इस कॉलेजन के कारण मंगल के क्रश में काफी अंदर मौजूद रॉक्स भी बाहर आ गए होंगे जो कि इस समय इस क्वेटर में मौजूद हैं जिन्हें स्टडी करके हम मंगल के क्रस्ट के बारे में काफी कुछ जान पाएंगे।

इंपैक्ट होने के कुछ सालों बाद तक भी वहां मौजूद रॉक्स काफी गर्म ही रहे होंगे जिसके कारण वहां हॉटस्प्रिंग का भी अस्तित्व रहा होगा इन स्प्रिंग के डिपॉजिट भी अच्छे टारगेट होंगे मंगल पर इंसेंट लाइट की मौजूदगी का पता लगाने के लिए।मंगल ग्रह के चट्टानों और मिट्टी के सैंपल को अच्छी तरह से टेस्ट करने के लिए पर लाने का वैज्ञानिकों का जनरेशन से सपना रहा है।

उनका यह सपना भी Perseverance के कारन सच होगा। दरअसल Perseverance के रोबोट आर्म के नीचे वाले पाठ में एक ट्रैलरर मशीन मौजूद है।

इसका इस्तेमाल करके Perseverance मंगल गृह के सतह और वहां मौजूद चट्टानों के अंदर ड्रिल करेगा। ड्रिल करने के दौरान उनके कुछ छोटे-छोटे टुकड़ों को एक सैंपल तुब के अंदर कलेक्ट करता चला जाएगा और उन्हें अपने अंदर मौजूद स्पेस में सील कर लेगा और वहां के जमीन और चट्टानों के सैम्पल्स को स्टोर करता जायगा।

अलग-अलग तरहा के सैम्पल्स जब जमा हो जायेगे तब ये उस सील्ड कंटेनर को मंगल की जमीं पर गिरा देगा ताकि Future Sample Return Mission के जरिये उन सैम्पल्स को पृथ्वी पर लाया जा सके।

Future Sample Return Mission

जहां तक फ्यूचर सैंपल रिटर्न मिशन की बात है तो इसे 2 मिशन के जरिए अंजाम दिया जाएगा सबसे पहला मिशन होगा लैंडर मिशन जो कि 3 मेजर एलिमेंट्स को कैरी करेगा।

इसमें पहला एलिमेंट होगा एक सैंपल फेच रोवर, जो मंगल पर उतरकर Perseverance द्वारा वहां छोड़े गए सैंपल्स को कलेक्ट करेगा इसमें दूसरा एलिमेंट होगा एक सैंपल ट्रांसफर आर्म, जो सैंपल रोवर द्वारा कलेक्ट किए गए सैंपल को रॉकेट में ट्रांसफर करेगा और इसका तीसरा एलिमेंट होगा 1 मार्च एसेंट व्हीकल, जो कि बेसिकली एक रॉकेट होगा।

सैंपल ट्रांसफर आर्म जब सैंपल को इसमें ट्रांसफर कर देगा तब यह मंगल ग्रह की सतह से उड़ान भरते हुए स्पेस में पहुंच जाएगा और सैंपल कंटेनर को स्पेस में ले जाकर छोड़ देगा।

उधर साल 2026 में पृथ्वी से मंगल के लिए एक ऑर्बिटल लांच किया जाएगा जो ठीक उस समय तक मंगल तक पहुंचेगा जब मंगल से सैंपल को ला रहा रॉकेट स्पेस में पहुंचेगा।

ये ऑर्बिटर उन् सैंपल कंटेनर तक पहुंचेगा और उसे कैप्चर करेगा उसके बाद जो सैंपल को लाकर साल 2031 में पृथ्वी पर पहुंचा देगा।अगर तकनीक की बात करें तो Perseverance सात एडवांस इंस्ट्रूमेंट अपने साथ ले गया है जिनमें INGENUITY DRONE भी शामिल है।

इसमें मौजूद SUPER-CAM मंगल पर मौजूद मिट्टी और चट्टानों को अपने कैमरा, लेजर और स्पेक्ट्रोमीटर से एग्जामिन करके उसमें मौजूद ऑर्गेनिक कंपाउंड का पता लगाने में सक्षम है ,

मंगल पर कोई ऑर्गेनिक कंपाउंड अगर हममे मिलता है, तो ये साफ हो जाएगा की किसी जमाने में वह जीवन किसी रूप में मौजूद रहा होगा।यह 20 फीट की दूरी से एक पेंसिल की नोक जितने छोटे टारगेट के भी केमिकल और मिनरल मेकअप के बारे में पता लगा सकता है।

अगर MASTCAM-Z की बात करें तो यह Perseverance का माउंटेड कैमरा सिस्टम है।इसमें मौजूद कैमरा ज़ूम इन कर सकते हैं, फोकस कर सकते हैं और हाई स्पीड पर 3D पिक्चर्स और वीडियो भी निकल सकते हैं।बसीकली इसे मंगल गृह के सतह और वातावरण के हाई डेफिनिशन वीडियो और 3D इमेजेस लेने के मकसद से लगाया गया है।

इसमें एक ZOOM Lens भी मौजूद है जिसका इस्तेमाल कर दूर मौजूद टारगेट को मैग्निफि कर के देखा जा सकता है।

MEDA – Mars Environmental Dynamics Analyzer

एक इंस्ट्रूमेंट है जिसे जगीरो क्रेटर के Weather Report देने के लिए Perseverance में लगाया गया है।

यह वेदर मेज़रमेंट करेगा, यानी कि यह वहां मौजूद भिंड के स्पीड और डायरेक्शन के साथ-साथ यह हमें वहां के टेंपरेचर और ह्यूमिडिटी के बारे में भी हमें बताएगा साथ ही साथ यह हमें यह भी बताएगा कि मंगल के वातावरण में डस्ट पार्टिकल किस मात्रा में मौजूद है और उन का साइज कितना है।

MOXIE – Mars Oxygen In-Situ Resource Utilization Experiment

इसके बारे में मैं आपको पहले ही बता चुका हूं यह बेसिक के लिए एक नई तकनीक को टच करेगा जिसका इस्तेमाल करके मंगल के वातावरण में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड से ऑक्सीजन प्रोड्यूस किया जा सके .

फ्यूचर में होने वाले मानव मिशन में इसी तकनीक का इस्तेमाल करके मंगल पर ऑक्सीजन प्रोड्यूस करने की प्लानिंग है जिसका इस्तेमाल सांस लेने के अलावा रॉकेट propelant के रूप में भी किया जा सकेगा।

PIXL – Planetary Instrument for X-ray Lithochemistry

इसमें एक टूल मौजूद है जो बहुत छोटे स्केल पर भी केमिकल एलिमेंट्स को आइडेंटीफ़्य कर लेता है यानी कि बालू के एक छोटे से छोटे सैंपल का केमिकल कंपाउंड क्या है, PIXL यह पता लगाने में सक्षम है।

PIXL में एक कैमरा भी लगाया गया है जो मंगल के पत्थर और मिट्टी के क्लोजअप फोटो ले सकता है।

जानकारियों से वैज्ञानिकों को मंगल पर लाइफ ढूंढने में काफी मदद मिलेगी।

RIMFAX- Radar Imager for mar’s subsurface Experiment

इसमें ग्राउंड मनुपुलटिंग सेंसर मौजूद है जो राडार का इस्तेमाल कर के नीचे मौजूद जमीन के अंदर की जूलॉजिकल को देख सकता है।

SHERLOC – Scanning Habitable Environments with Raman & Luminescence for Organics & Chemicals

यह डिवाइस ग्रोवर के रोबोटिक आर्म पर माउंटेड है SHERLOC कैमरा स्पेक्ट्रोमीटर और लेजर का इस्तेमाल करता है और मिनरल्स और ऑर्गेनिक का पता लगाने के लिए जो बॉर्डर एनवायरमेंट के कारण बनते हैं और माइक्रोबियल लाइफ के साइंस हो सकते हैं।

ब्लैक एंड वाइट कांटेक्ट कैमरा के अलावा इसमें 1 वाटसन नाम का एक कलर कैमरा भी मौजूद है जो मंगल के रोग रेंस और सरफेस टेक्सचर का क्लोजअप शॉट ले सकता है।

इस मिशन की खास बात यह है कि पहली बार NASA ने Perseverance द्वारा खींचे गए Raw imaes को अपने ऑफिशियल वेबसाइट पर पब्लिकली अवेलेबल कराने का फैसला किया है।

यानी कि Perseverance मंगल पर जो भी तस्वीरें खींचेगा उसे आप बिना किसी परेशानी के देख सकते हैं साथ ही साथ Perseverance द्वारा मंगल पर रिकॉर्ड किए गए साउंड को भी सुन सकते हैं।

दोस्तों हमारा ब्रह्मांड इतना बड़ा है कि पृथ्वी जैसे अनगिनत ग्रह इसमें मौजूद होंगे।

जब पृथ्वी पर जीवन मौजूद है तो उन ग्रहों पर भी जीवन निश्चित रूप से मौजूद होना चाहिए।

ऐसा कोई कारण नहीं नजर आता है जो ऐसे ग्रहों पर जीवन की उत्पत्ति होने से रोक दें ऐसे में हमारे लिए यह मानना बेहद ही मुश्किल है कि इस ब्रम्हांड में जीवन केवल पृथ्वी पर ही मौजूद है पर सोलर सिस्टम के किसी भी ग्रह उपग्रह या किसी अन्य ऑब्जेक्ट पर हमें जीवन के कोई भी पुख्ता प्रमाण अभी तक नहीं मिले हैं।

इसलिए जब भी दूसरे ग्रहों पर जीवन की मौजूदगी से संबंधित बातें होती हैं तो हम हमेशा संभावनाओं में बात करते हैं।

ऐसे में मंगल पर अगर हमें पास्ट लाइक के कोई पुख्ता प्रमाण अगर मिलते हैं तो इससे यह साबित हो जाएगा कि जीवन केवल पृथ्वी पर ही मौजूद नहीं है बल्कि यह दूसरे अन्य ग्रहों पर भी काफी कॉमन है।

यह जानकारी न सिर्फ हमारी सोच को एक नया आयाम देगी बल्कि हमें इस ब्रह्मांड को और अच्छे तरीके से जानने के लिए प्रेरित करेगी इसलिए Perseverance मिशन हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है।

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