पुलिस ने पकड़ा चाइनीज लोन ऐप रैकेट, Police Ne Pakada Chinese Loan App Racket

टेक्नोलॉजी  जहाँ  आबाद कर रही है. वहाँ हमें  बर्बादी  के गर्त  में  भी ले  जा रही  है।

पुलिस ने पकड़ा चाइनीज लोन ऐप रैकेट, Police Ne Pakada Chinese Loan App Racket

Police Ne Pakada Chinese Loan App Racket:

तभी  बीते दिनों चाइनीज लोन ऐप रैकेट जैसे  बड़े  क्राइम का पर्दाफाश  दिल्ली  पुलिस  ने किया । एक गिरोह कर्ज की जबरन वसूली करते  हुए  पकड़ा  गया ।

पुलिस  ने पूरे  देशभर में  छापेमारी की, जिसमें एक महिला सहित 8संदिग्धों आरोपियो को गिरफ्तार किया  गया।

महिलाओं की न्यूड तस्वीरें भेजकर किया ब्लैकमेल,  क्रिप्टोकरेंसी से चीन-दुबई में लगाया पैसा

सभी संदिग्ध गिरोह चीन, हांगकांग और दुबई में  क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से  पैसा लगा रहे थे। पुलिस ने छापेमारी कर 25 से ज्यादा बैंक अकाउंट्स की जांच की तो  पता लगा  कि  उनके अकाउंट में जबरन वसूली के 8.25 करोड़ रुपए रखे  हुए हैं।

रुपए  तो मिले  ही  साथ  में SUV, लैपटॉप, दर्जनों डेबिट कार्ड और पासबुक भी  बरामद किए गए ।

पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना ने इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस यूनिट से ऐसे गिरोह पर कार्रवाई करने के निर्देश जारी किये  थें और  फ़िर करवाई  करने  के  बाद  डीसीपी (स्पेशल सेल) केपीएस मल्होत्रा ने  एक टीम  बनाकर  जाँच  शुरू  कर  दी ।

दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान से आरोपी  हुए गिरफ्तार

 पुलिस  की जाँच  टीम  ने   टेक्निकल छानबीन और खुफिया जानकारी  करने  के  बाद,  ACP रमन लांबा, इंस्पेक्टर मनोज और दूसरी टीमों ने दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और देश के दूसरे हिस्सों से संदिग्ध आरोपियों  को गिरफ्तार किया।

इस  कार्रवाई  को करने  में  कम  से कम  हफ्ते  का समय  लग गया। इस  वारदात को अंजाम  देने  के बाद  उसमे  प्रयोग  हुए मोबाइल नंबर और डिवाइस बरामद किए गए।

मॉर्फ्ड न्यूड तस्वीरें भेजकर  जबरन  वसूली  की

पुलिस  ने  जो  सामान  ज़ब्त  किया उसमे  गैजेट्स की खोजबीन करने पर यह मिला  कि जबरन  वसूली  के लिए आरोपी महिलाओं की तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ करके उनके कॉन्टैक्ट से  न्यूड फोटो भेज रहे थे।

अब दिल्ली पुलिस मनी लॉन्ड्रिंग करते  हुए प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग को सूचित करने वाली  है ।

इस आरोपी  गिरोह ने अपने ऐप के जरिए लोगों को लोन देकर  10-20 गुना पैसा वसूला लिया। अगर  लोगों  ने भुगतान में देरी की  तो  पीड़ितों को धमकाते  हुए  गाली देने  के साथ-साथ  परेशान और बदनाम भी  किया गया।

आरोपी  गैंग का मास्टरमाइंड जोधपुर से पकड़ा  गया

पुलिस  ने  मुस्तैदी  दिखाते  हुए  गिरोह के सरगना कृष्ण उर्फ ​​रविशंकर को जोधपुर से गिरफ्तार  करके  इस  रैकेट  का पर्दाफाश  किया।

रविशंकर ने एक संदिग्ध चीनी नागरिक के साथ काम किया था, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार  कर लिया है। फ़िलहाल उसकी पहचान उजागर नहीं की जा  रही है। रविशंकर  ने चालाकी  दिखाते  हुए अपने विश्वसनीय चीनी साथी को सभी  बैंक अकाउंट डिटेल्स देकर लोगों  से  जबरन वसूले गए रुपए  को क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से  चीनी  अकाउंट में  ट्रांसफर  कर दिया।

पुलिस  ने  तीन चीनी नागरिकों के क्रिप्टो अकाउंट्स की पहचान करते  हुए इस  रैकेट  का भांडा  पूरी  तरह  फोड़  दिया।

मल्होत्रा ने   जानकारी दी  कि एक कार्तिक पांचाल  नाम के  आरोपी ने  अपनी टीम  बनाते  हुए  उन लोगों  के बारे  में  पता लगाया  जो लोग  कर्ज लेना चाहते थे या उन्होंने कर्ज लिया था। इस  कार्तिक पांचाल  को गिरफ्तार  कर लिया  गया  है ।

लिया  6 हजार का लोन  और  चुकाए  30 से 40 हजार

पुलिस  ने जब  तकनीकी जांच की तो  पता  चला  कि गिरोह ने बिना KYC वैरिफिकेशन के अपने एंड्रॉयड ऐप के जरिए आसानी से लोन  लोगों  को  दे  दिए। उन्होंने लोगों  को अपने  झांसे  में  लेने  के  लिए  कम समय  में लोन  देने  का वादा  किया और  फ़िर  उन्होंने पूरा लोन अमाउंट तो  दिया नहीं बल्कि  उन  पीड़ितों से  ज्यादा चार्ज लेने  के बहाने  ढूँढ़ते  रहे।

डीसीपी ने इस  बात  का  भी खुलासा  किया  कि  अगर पीड़ितों  का   लोन अमाउंट 6,000 रुपए था तो उन्होंने सर्विस और दूसरे चार्ज के रूप में लगभग 2,300 रुपए काटते हुए केवल 3,700 रुपए लोन  के रूप  में  दिए।

फ़िर  पीड़ित को ब्याज के साथ 6,000रुपए वापस करने पड़ते थे और  फ़िर धीरे-धीरे वही  लोन  हफ्तों के भीतर 30,000-40,000 रुपए तक पहुंच जाता था।

कैसे  करते  थे ठगी

जिन्हे लोन लेना  होता  था  वह  लोन  ऐप को अपने फोन में डाउनलोड करता था और इन्स्टॉल करते समय परमिशन देता था।

तब यह  गिरोह  लोन का 60 से 70%अमाउंट टारगेट के खाते में क्रेडिट करते थे।

कंपनी उन टारगेट के फोन में मालवेयर इन्स्टॉल करकर फोन को हैक करके पर्सनल डेटा चुरा लेते थे।

फ़िर  इसके बाद लोन वापस करने के लिए दबाव  बनाते  हुए  ब्लैकमेल और धमकी देते थे तथा अधिक ब्याज दर और अन्य चार्ज की मांग करते थे।

वे  गैंग वाले गाली गलौज करकर  टारगेट से  लोन अमाउंट  वापिस  लेते  थे।

उनका  मकसद   होता  था   कि  तय राशि से ज्यादा मिले तब यह उत्पीड़न रुका  जाए।

हमें  किसी  भी  ऐप  को इनस्टॉल करने  से  पहले  जांच -पड़ताल  करनी  चाहिए । गूगल  बाबा  की मदद  या अन्य  किसी  तकनीक  के ज़रिये  पता  लगाना  चाहिए ।

हालांकि  ये  हैकर्स  हमसे  दस  कदम आगे चलते  है,  अगर   हम  सावधानी  और  सतर्कता  बरते  तो  शायद  क्राइम  और  क्रिमिनल  दोनों  से बचा  जा सकता  है ।

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