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250+ गुलज़ार साहब की शायरियां Gulzar Shayari in Hindi
वो मोहब्बत भी तुम्हारी थी नफरत भी तुम्हारी थी,हम अपनी वफ़ा का इंसाफ किससे माँगते..वो शहर भी तुम्हारा था वो अदालत भी तुम्हारी थी. Gulzar Shayari In Hindi [गुलज़ार साहब की शायरियां] यूँ भी इक बार तो होता कि समुंदर बहताकोई एहसास तो दरिया की अना का होता बेशूमार मोहब्बत होगी उस बारिश की बूँद…